●भारत में नकलची●

हमारे देश में नकलची लोगों की तादाद सबसे अधिक है। एक इंसान अपना दिमाग लगाकर कुछ नया बनाता है और 1000 इंसान उसकी नकल करने लगते हैं जैसे कि उनका दिमाग ही काम ना करता हो। जहाँ देखों वहाँ नकलची दिखाई देते हैं। कोई भी क्षेत्र इनसे बचा नहीं है। जैसे– vigo video पर एक इंसान कुछ नया करता दिखाई देता है। उसकी नकल कर 100 लोग ठीक वैसा ही act बना देते हैं। जो देखने में अच्छे नहीं लगते हैं। असली act सबको अच्छा लगता है। नकल करने वाला बिल्कुल भी अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं करता है वह ठीक वैसे ही नकल करता है जैसी उसने देखी है। अगर कुछ गलती मूल act में रह जाती है तो वो हमेशा नकली act में बनी रहती है।

ज्यादा से ज्यादा अपना दिमाग इस्तेमाल करें और एक नई चीज दुनिया को दें, जो समाज के लिए उपयोगी हो।

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#बिजी हूँ।#

“मेरे पास टाइम नहीं है मैं बहुत बिजी हूँ। ” हम अक्सर यह सुनते रहते हैं। हमारे पास किसी परिचित की बात सुनने का टाइम नहीं है लेकिन मोबाइल हर समय चलाने का टाइम ही टाइम है।

$मेरा घर$

सबसे अच्छा मेरा घर।

सबसे सुंदर मेरा घर।

सबसे प्यारा मेरा घर।

सबसे न्यारा मेरा घर।

मेरी आँखों का तारा घर।

मेरी आन बान शान मेरा घर।

मेरी इच्छाओं, मेरी अभिलाषाओं का घर।

मेरी दुनिया मेरा घर।

मेरे सपनों का घर।

मेरे अपनों का घर।

मेरा बन रहा है घर।

#एक गलती पर हजार बार आलोचना#

आलोचना करना लोगों का प्रिय शौक है अगर उन्हें आलोचना करने का मौका मिले तो वे दूसरे इंसान की इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देते हैं जैसे वो उनका दुश्मन हो।

एक और एक ग्यारह

एक और एक दो होते हैं सब जानते हैं लेकिन एक और एक ग्यारह होते हैं हमारा ध्यान इस बात पर कम जाता है। अगर एक और एक मिल जाये तो ग्यारह के बराबर होते हैं। जहाँ एकता है वहीं शक्ति है। हमें अपने दुश्मनों का मुकाबला एक और एक ग्यारह बनकर करना चाहिए।

★सादा जीवन उच्च विचार★

कुछ व्यक्तियों का जीवन इतना महान होता है बाकी लोग उनके बारे में अनुमान भी नहीं लगा पाते हैं।

आज तड़क-भड़क का जमाना है सभी दिखावा करने में व्यस्त हैं। सच्चाई और ईमानदारी कहीं खो गई है। आज इंसान दूसरे व्यक्ति से सिर्फ अपने स्वार्थ के कारण मिलता है पीठ पीछे उस व्यक्ति की बुराई करता है। सच्चे और ईमानदार लोग मिलने मुश्किल हो गए हैं। सब कुछ दिखाबा लगता है।

★आलसियों की इच्छा★

मुझे एक अच्छी नौकरी मिल जाये बिना कठिन परिश्रम किये।

मुझे अलादीन का चिराग मिल जाये।

मुझे हीरे-जवाहरात कहीं पड़े मिल जायें।

मुझे कभी जिंदगी में काम ना करना पड़े।

आलसियों को काम के नाम से ही बुखार आ जाता है।

मैं सचिन, धोनी बन जायूँ बिना क्रिकेट खेले।

मेरे पास सारी सुविधाएं उपलब्ध हों।