😢😢😢😢😢😢😢आखिर एक शिक्षित युवा क्यों नहीं अपने मन के मुताबिक रुपये माँग पाता है, अपने नियोक्ता से???😢😢😢😢😢😢😢

बहिनों और भाइयों में आपका ध्यान, एक शिक्षित वर्ग की प्रमुख समस्या पर दिलाना चाहता हूँ, कि एक शिक्षित युवा आखिर क्यों बेरोजगार रहने पर मजबूर होता है?, क्यों समाज उसका शोषण करने पर उतारू होता है?, क्या वो अपने काम के रुपए तय नहीं कर सकता है?, क्या उसने लाखों रूपये खर्च करके शिक्षा सिर्फ इसलिए पाई है कि वह चंद सिक्कों के लिए गुलामी करता फिरे? या बेरोजगारी में अपने सपनों को टूटता हुआ चुपचाप देखे और किसी से कुछ ना कह सके? या उसकी कीमत एक मजदूर से भी गई-बीती है, जो हमारा समाज उसे चंद सिक्के ही दे पाता है। आखिर ये शोषणकारी व्यवस्था किसने बनाई है, जो एक मजदूर को उसकी दैनिक मजदूरी 350₹ (आज के अनुसार) दे देती है और दूसरी तरफ एक नौजवान एक स्कूल में बहुत ही कम कीमत पर अध्यापन कार्य करने के लिए मजबूर होता है, क्या उस टीचर के कार्य की वैल्यू एक मजदूर के कार्य से कम क्यों है? क्या इस शोषणकारी व्यवस्था का अंत नहीं हो सकता है?

मान लीजिये आपको अपने घर में लौहे की चौखटों में कुंडी लगाने के लिए बेल्डिंग करानी है, आप बेल्डर से बात करते हैं, भाई मेरे घर में 8 दरवाजों में कुंडी लगाने के लिए आप बेल्डिंग कर देंगे, कितने रुपये लेंगे, तो वो आपको इस मामूली काम के 1000₹ बताएगा, आप बहुत पैसे कम करने की कोशिश करेंगे, तो वो 800₹ में मानेगा, चाहे आप पूरा एटा घूमकर देख ले फिर भी प्रत्येक बेल्डर 1000/1200₹ से कम की बात नहीं करेगा।

ये एक वास्तविक उदाहरण है। क्या एक शिक्षित युवा किसी स्कूल में ये कह सकता है कि मैं प्रत्येक दिन के 1000₹ लूँगा? जरा सोचकर देखिए, कैसे हमारा समाज शिक्षित लोगों के साथ भेदभाव करता है? क्या इस शिक्षा का नौकरी के अलावा भी कुछ काम है या ये शिक्षा सिर्फ बेरोजगारों की फौज बनाने के लिए है?

भारत की शिक्षा कब उधोगपरक बन सकेगी?, जब किसी को बेरोजगार नहीं रहना पड़ेगा। युवा उद्योग परक शिक्षा प्राप्त करके स्वयं अपना बिजनेस स्थापित कर सकेगा और रोजगार प्राप्त करने के साथ-2 हजारों लोगों को रोजगार देगा।

♂SEX ♀

रमन और कविता अच्छे पति-पत्नी हैं, दोनों में खूब जमती है। रमन को संगीत का शौक है। इस शौक को पूरा करने के लिए जनाब गिटार बजाना सीख रहे हैं लेकिन अभी तक कुछ ज्यादा नहीं आता है केवल अपना मजाक बनवा लेते हैं। कविता को ऎक्ट्रेस बनने का भूत सवार है, जब देखो शीशे के सामने खड़े होकर मेकअप लगाती रहती है। वास्तव में वह बहुत सुंदर महिला है। उसे जो एक बार देखे तो उस पर फिदा हो जाये।

एक दिन कविता और रमन में झगड़ा हो जाता है। इन दोनों की बात सुनकर मालूम पड़ता है कि दोनों में झगड़ा सेक्स को लेकर हुआ है। कविता अपने पति रमन से कहती है कि,”तुम्हें हर दिन सेक्स चाहिए कभी मेरे बारे में नहीं सोचते हो केवल अपनी मनमानी करते रहते हो। मैं भी इंसान हूँ मुझे हर दिन यह सब अच्छा नहीं लगता है। जब देखो तब सेक्स, तुम्हें सेक्स की बातें करने में बड़ा मजा आता है लेकिन मुझे हर समय यह सब अच्छा नहीं लगता है। परेशान हो गई हूँ इस सबसे। मुझे मेरे घर भी नहीं जाने देते हो। मेरा जीवन नर्क बन गया है। अच्छा है कि मैं मर जाऊँ।”

रमन कहता है ,”जानू मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ, तुम फालतू में बात कर रही हो। मैं तुम्हें हमेशा खुश देखना चाहता हूँ।”

“खुश देखना चाहते हो? लेकिन मेरी एक भी बात नहीं मानते हो और दावा कर रहे हो कि मुझे खुश देखना चाहते हो।”

हां जानू यह सच है”

मुझे कुछ नहीं सुनना है”

यह कहकर कविता घर से बाहर निकल जाती है। कुछ घंटे बाद वापस आती है। तब तक उसका मूड सही हो चुका होता है। उस दिन के बाद से रमन पूरी तरह से बदल चुका होता है वह अब कविता के साथ सेक्स नहीं करता है, धीरे-धीरे दो महीने बीत जाते हैं लेकिन रमन बिल्कुल भी सेक्स नहीं करता है। कविता को यह सब देखकर बहुत आश्चर्य होता है जो पति रोजाना सेक्स करता था अब उसे हाथ भी नहीं लगा रहा है लेकिन रमन का व्यवहार अब बदल जाता है। वह दिखावा ज्यादा करने लगता है। कविता सब समझ जाती है कई बार अपने पति को मनाने की कोशिश करती है लेकिन सब व्यर्थ जाता है।

एक दिन कविता, रमन की गोद में अपना सिर रखकर लेट जाती है लेकिन रमन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है तब कविता कहती है,” हे भगवान मुझे उठा हो और इस संसार से मुक्ति प्रदान करो।”

रमन को एहसास होता है कि उसने कविता का दिल दुखाया है। वह क्षमा माँग लेता है फिर दोनों का जीवन नॉर्मल हो जाता है।

##कोरोना वैश्विक महामारी##

आज कोरोना महामारी ने पूरे विश्व को पछाड़ कर रख दिया है। आज उद्योग धंधे बर्बाद हो चुके हैं और लाखों लोगों की जान जा चुकी है। पूरी मानवता त्राहि-२ कर रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, इटली, स्पेन, फ्रांस आदि देशों में काफी लोग मारे जा चुके और रोजाना हजारों की संख्या में लोग मारे जा रहे हैं। इसकी वेक्सीन उपलब्ध नहीं है। लेकिन डॉक्टर अपने स्तर पर मदद कर रहे हैं। हजारों की संख्या में डॉक्टर कोरोना से संक्रमित हो कर जान गवां रहे हैं।

सर्दी का सितम

बहुत ज्यादा सर्दी बढ़ गई है। पहाड़ों पर बर्फ गिर रही है। अपना और अपने परिवार का ध्यान रखें। बिना सिर, पैर, हाथ ढके बाहर ना निकलें। हमारी थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा हो जाती है। जिन लोगों की दवा चल रही है तो उसे ठीक होने तक लेते रहें। किसी की बराबरी ना करें मसलन अगर कोई सिर्फ शर्ट पहनकर बाहर घूम रहा है तो या तो वह फैशन का दीवाना है और लोगों को दिखाता फिर रहा है कि मैं कितना स्ट्रांग हूँ । या उसकी मजबूरी है। सर्दी में हमारी कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। हमारा शरीर ठीक से कार्य नहीं करता है क्योंकि सर्दी में हमारा शरीर सिकुड़ता है। इससे सारा शरीर प्रभावित होता है। खानपान पर विशेष ध्यान दें। ठंडी चीजों का सेवन ना करें। गर्म पानी से स्नान करें, तुरंत कपड़े पहन लें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।

●भारत में नकलची●

हमारे देश में नकलची लोगों की तादाद सबसे अधिक है। एक इंसान अपना दिमाग लगाकर कुछ नया बनाता है और 1000 इंसान उसकी नकल करने लगते हैं जैसे कि उनका दिमाग ही काम ना करता हो। जहाँ देखों वहाँ नकलची दिखाई देते हैं। कोई भी क्षेत्र इनसे बचा नहीं है। जैसे– vigo video पर एक इंसान कुछ नया करता दिखाई देता है। उसकी नकल कर 100 लोग ठीक वैसा ही act बना देते हैं। जो देखने में अच्छे नहीं लगते हैं। असली act सबको अच्छा लगता है। नकल करने वाला बिल्कुल भी अपना दिमाग इस्तेमाल नहीं करता है वह ठीक वैसे ही नकल करता है जैसी उसने देखी है। अगर कुछ गलती मूल act में रह जाती है तो वो हमेशा नकली act में बनी रहती है।

ज्यादा से ज्यादा अपना दिमाग इस्तेमाल करें और एक नई चीज दुनिया को दें, जो समाज के लिए उपयोगी हो।

#बिजी हूँ।#

“मेरे पास टाइम नहीं है मैं बहुत बिजी हूँ। ” हम अक्सर यह सुनते रहते हैं। हमारे पास किसी परिचित की बात सुनने का टाइम नहीं है लेकिन मोबाइल हर समय चलाने का टाइम ही टाइम है।

$मेरा घर$

सबसे अच्छा मेरा घर।

सबसे सुंदर मेरा घर।

सबसे प्यारा मेरा घर।

सबसे न्यारा मेरा घर।

मेरी आँखों का तारा घर।

मेरी आन बान शान मेरा घर।

मेरी इच्छाओं, मेरी अभिलाषाओं का घर।

मेरी दुनिया मेरा घर।

मेरे सपनों का घर।

मेरे अपनों का घर।

मेरा बन रहा है घर।

#एक गलती पर हजार बार आलोचना#

आलोचना करना लोगों का प्रिय शौक है अगर उन्हें आलोचना करने का मौका मिले तो वे दूसरे इंसान की इज्जत की धज्जियाँ उड़ा देते हैं जैसे वो उनका दुश्मन हो।

एक और एक ग्यारह

एक और एक दो होते हैं सब जानते हैं लेकिन एक और एक ग्यारह होते हैं हमारा ध्यान इस बात पर कम जाता है। अगर एक और एक मिल जाये तो ग्यारह के बराबर होते हैं। जहाँ एकता है वहीं शक्ति है। हमें अपने दुश्मनों का मुकाबला एक और एक ग्यारह बनकर करना चाहिए।