24 घंटे ऑनलाइन?

क्या हर समय ऑनलाइन रहना जरूरी है? फ़ेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर व्यक्ति हर समय ऑनलाइन रहता है। फेसबुक पर लोगों के लाखों फ्रेंड होते हैं। हम उनका हालचाल हर समय पूछते रहते हैं। क्योंकि हम सामाजिक प्राणी है। अच्छा है ऐसा होना भी चाहिए। व्हाट्सएप के द्वारा हमें पलभर में कोई भी खबर मिल जाती है। लेकिन व्हाट्सएप और ट्विटर का प्रयोग फर्जी massage भेजने और लोगों को हिंसा करने के लिए उकसाता है। यह गलत प्रयोग है। आज नफरत फैलाने के लिए इन सोशल साइट्स का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। जनता बिना सच्चाई जाने इन फर्जी massages को सच मान लेती है। आज किसी को भी बड़ी आसानी से बदनाम किया जा सकता है। आप से कोई कुछ पूछने वाला नहीं है। जनता व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम के हर massage को वेद वाक्य समझकर फॉलो करती है। और आगे फॉरवर्ड कर देती है। लोग एक दूसरे के भगवान का निरादर करते दिखाई देते हैं। कोई मूर्ख भगवान शिव का निरादर करते दिखाई देता है, तो कोई मूर्ख हमारे राष्ट्रीय तिरंगे का अपमान करते दिखाई देता है। कोई मूर्ख महिलाओं का मजाक उड़ाते दिखाई देता है। इन सब कामों से वे अपनी मूर्खता का ही प्रदर्शन करते हैं। अच्छा इंसान “जिओ और जीने दो” का सिद्धांत मानता है। इन असामाजिक तत्वों पर रोक लगनी चाहिए। सोशल साइट्स को इनके एकाउंट बंद कर देने चाहिए। औऱ ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए अगर कोई व्यक्ति इन साइटों पर गलत संदेश टाइप करता है तो उसका संदेश तुरंत मिट जाना चाहिए और वार्निंग आनी चाहिए कि तुमने दुवारा नफरत फैलाने वाला संदेश लिखा तो तुम्हारा एकाउंट ब्लॉक कर दिया जाएगा। सोशल साइट्स पर एकाउंट खोलने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य किया जाय जिससे फर्जी एकाउंट खुलने बंद हो जाएंगे और भड़काऊ संदेशों से मुक्ति मिलेगी। हर समय ऑनलाइन रहने से हमारे रोजमर्रा के काम प्रभावित होते हैं। आज हम कम सोते हैं ज्यादा ऑनलाइन रहते हैं जिससे हमारा स्वास्थ्य प्रभावित हो जाता है। हमारे रिश्तों में तनाव आ जाता है। हम घर-परिवार से ज्यादा समय सोशल साइटों पर बिताते हैं। इससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है।

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खूबसूरती

खूबसूरती वह नहीं जिसे समझते हैं सभी ।

खूबसूरती तो वह है जो दिखती है कभी – कभी ।

सुंदर आँखे और खूबसूरत चेहरा ।

इसमें भी है कुछ दर्द ठहरा ।

अवगुणों में लिपटी सुंदर काया ।

ऐसी है जैसे – मृत की छाया ।

खूबसूरती की छाया में वो जहर का घूंट पिलाते रहे ।

हम तुम्हारे मित्र हैं लोग ऐसा कहकर बहलाते रहे ।

अच्छी सोच और चरित्र सुंदरता की माला है ।

कोयला चाहे रंग दो फिर भी काला है ।

खूबसूरती का मुखोटा लगाकर लोग आस पास भटकते रहे ।

ठंडे बादल बनकर तेजाब की तरह बरसते रहे ।

बुरे लोग भले ही पहन लें अच्छाईयों का चोला ।

सूर्य नहीं बन सकता कभी शीतल, निर्मल ओला ।

दया , सहनशीलता और विनम्रता भी है खूबसूरती के अंग ।

सद्गुण व्यक्तियों के हमेशा रहते हैं ये संग ।

हकीकत या कुछ और ?

दुनिया के हर देश में भूत- प्रेतों में विश्वास करने वाले अनेक लोग मिल जायेंगे। जो अपने रोचक किस्सो द्वारा आपको बताएंगे कि उन्होंने भूत कब और कैसे देखा। हमारी हिंदी फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि जब कोई बुरा व्यक्ति किसी अच्छे व्यक्ति को मार देता है तब मरने वाला व्यक्ति मारने वाले से बदला लेता है । इसमें कोई दो रॉय नहीं है कि यह बात कोरी कल्पना है । क्योंकि अगर ऐसा सच में होता तो किलर जो हर साल लाखों लोगों को मार देते हैं । वह जिंदा नहीं बचते । और आत्मा के डर से कोई किलर किसी बेगुनाह व्यक्ति को नहीं मारता । मुझे यह बात बड़ी हैरान करती है कि जैसे किसी आम आदमी को भूत कभी – कभी दिखाई दे जाते हैं ऐसा कभी किसी वैज्ञानिक के साथ क्यों नहीं होता है क्या भूत वैज्ञानिकों से डरते हैं । हमारे देश के इंडियन भूत पीपल के पेड़ पर उल्टे लटके होते हैं । भारतीय लोगों का यह विश्वास है कि भूतों के उल्टे पाँव होते हैं । उनके आने का समय दोपहर या रात के 12 बजे बताया जाता है । विश्व में कई जगहें तो भूतों के कारण ही फेमस हैं । भारत के राजस्थान में भानगढ़ का किला भी भूतिया किलो में शामिल है भानगढ़ के किले पर अंग्रेजों ने अपना अधिकार कर हजारों बेगुनाह लोगों को मार डाला । तब से यह कहा जाता है कि हर रात उन लोगों की आत्माएं रोती हैं । अमेरिका की केलिफोर्निया की रहने वाली एलिस ने एक बंगला खरीदा । कुछ दिनों में ही वह बंगला उनके लिए मुसीबत बन गया । वह बताती हैं कि इसमें 4 औरतों की आत्माओं का कब्जा है जो उनपर घरेलू हिंसा करतीं हैं । अब वह यह घर बेचना चाहती हैं लेकिन कोई व्यक्ति लेना नहीं चाहता है । बताया जाता है की 1952 तक यह एक जेल थी जिसमें 4 औरतों को लाया गया जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी जुल्म को सहते हुए गुजार दी । बाद में उस जेल को तुडवाकर वहाँ बंगला बनवा दिया गया । स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि उन चारों औरतों की आत्मा आज भी उस बंगले में कैद है । भारत के बहुत से लोगों का कहना है कि रात के 12 बजे भूतों की बारात निकलती है । कुछ लोग तो इससे जुड़े अपने किस्से भी सुनाएँगे । मुझे समझ में नहीं आता है कि लोग भूतों से बचकर वापस घर कैसे आ जाते हैं । जबकि भूतों में कई दैवीय शक्तियों का वास होता है । वैज्ञानिकों को तो भूत कभी मिलते ही नहीं हैं तभी तो साइंस इसपर विश्वास नहीं करता है । वैसे भूत प्रेत बड़े बड़े आधुनिक नगरों में भी नजर नहीं आते हैं वह तो गाँवो के लोगों को परेशान करते हैं । वास्तव में सबसे बड़ा भूत तो अशिक्षा है जिसके कारण लोग इन बातों को बहुत मानते हैं बहुत से पाखण्डी बाबा भूतों को उतारने के नाम पर लोगों से मोटी रकम लेते हैं और हद तो तब हो जाती है जब ये पाखण्डी बाबा लोगों की बलि तक चढ़ाने जैसे बुरे कार्यों से भी नहीं डरते हैं ऐसे व्यक्ति किसी सही इंसान को देखकर भी यही कहेंगे कि इसपर भूत आ गया है। कुछ अंधविश्वासी लोग अज्ञानता के कारण कुछ अजीब तरह के मानसिक रोगों को ही भूत मान लेतें हैं । कुछ मानसिक रोगों के लक्षण ऐसे होते हैं कि जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि इस व्यक्ति पर भूत आ गया है एक मानसिक रोग में व्यक्ति को अनेक अजीबोगरीब आवाजे सुनाई देती हैं खासकर रात को सोते समय । जबकि यह सिर्फ उस व्यक्ति का वहम होता है । एक अन्य मानसिक रोग में रोगी को एक व्यक्ति सामने बैठा दिखाई देता है जिससे रोगी व्यक्ति दिनभर बातें करता है । रोगी व्यक्ति गुमसुम सा उदास तथा अकेले रहना पसंद करता है । वह अपने घर वाले लोगों को जब इस बारे में कुछ बताता है तो घर वाले समझते हैं कि इसपर भूत चढ़ गया है । और वह उसे ओझा के पास लेकर जाते हैं ओझा लोग उस रोगी पर किसी चुडैल या भूत का चक्कर बताते हैं । जबकि कई सारे मानसिक रोगों का इलाज सम्भव है । पर इन्हें समझना मुश्किल होता है । मानसिक रोग अधिकतर मस्तिष्क की किसी गड़बड़ी के कारण होते हैं । मानसिक रोगों को केवल उसके डॉक्टर ही समझ पाते हैं । हम भारतीय लोग पुराने जमाने के उल्टे पांव वाले भूतों से भी न उबरे थे कि हॉलीवुड वालों ने वैम्पायर भूतों का आविष्कार कर दिया । हालांकि यह भारतीयों के असली जीवन में अभी तक नहीं आ पाये हैं लेकिन भारतीय फिल्मों में तो आ ही गये हैं । वैम्पायर यानि खून पीने वाले भूत जिनके आगे के दांत नुकीले होते हैं । अंडरवर्ल्ड या ट्विलाइट जो भी हॉलीवुड मूवीज देख लीजिए सभी में वैम्पायर कुछ नई विशेषताओं के साथ आता है । ड्रैकुला वाले भूत तो वैम्पायरो से भी आगे हैं वह तो टब में खून भरकर नहाते हैं । यह सब हॉलीवुड फिल्मों में आम हैं हालांकि बॉलीवुड वाले इससे कम ही प्रभावित हुए हैं । वैसे वैम्पायर बहुत पहले खून पीने वाले चमकादरो को कहा जाता था । जो अमेरिका की लम्बी अंधेरी गुफाओं में बहुत पहले रहते थे । शायद विदेशियों को वैम्पायर वाले भूतों का नाम यहीं से मिला होगा । वैसे हमारे भारतीय लोग वैम्पायरो पर विश्वास नहीं करते हैं । गाँवो के अनपढ़ लोग तो चक्रवात को भी भूत मानते हैं । बॉलीवुड के कुछ गाने तो भूतों के कारण ही फेमस हो गए । वैसे ये गाने तो इंसान के लिए बनाये थे लेकिन अजीब बात है कि इनपर भूत ज्यादा मेहरबान हो गये । जैसे – झलक दिखला जा , और जा चुड़ैल आदि । कुछ लोगों का मानना था कि झलक दिखला जा गाना पीपल के पेड़ के नीचे चलाने पर भूत आ जाते हैं। शायद सिंगर लोगों को भी भूतों में दिलचस्पी है । क्या हॉलीवुड का कोई गाना ऐसा होगा जिसे सुनकर भूत आ जायें । अगर होगा भी तो उससे हमारे भारतीय भूत शायद ही आये क्योंकि शायद उन्हें अंग्रेजी भाषा समझ में ना आये । वैसे भी हॉलीवुड के गानों में इतना शोर होता है कि भूत भी डरकर भाग जायेंगे । हमारी हिंदी फिल्मों के भूत आग से डरते हैं क्योंकि अग्नि हमारे पूज्य देवता हैं लेकिन हॉलीवुड के भूत तो आग से भी नहीं डरते हैं बल्कि वह तो गन चलाते हुए नजर आते हैं । चलो अच्छा ही है वह हिंदी फिल्मों के भूतों की तरह छुपम-छुपाई का खेल नहीं खेलते हैं बल्कि सीधे दो दो हाथ करते हैं । चाइना वाले भूतों की फिल्में कम ही बनाते हैं वैसे ये अच्छा ही हैं क्योंकि उनके देश के कराटे चैम्पियन भूतों से भला कौन जीत पायेगा ।

मातृभूमि भारत

मेरी मातृभूमि तू।

मेरी कर्मभूमि तू।

मेरी धर्मभूमि तू।

मेरी जीवन का आधार तू।

मेरी श्रद्धा तू।

मेरी भक्ति तू।

मेरी शक्ति तू।

मेरी अभिलाषाओं की पूर्णाहुति तू।

मेरे साहस का स्रोत तू।

मेरा तन-मन-धन तू।

मेरी आकांक्षा तू।

मेरे सपने तू।

मेरे अपने तू।

मेरा सर्वस्व तू।

ऐसी माँ भारती को प्रणाम।

(जय हिंद)

स्वर्ग में लैपटॉप

जरा सोचिए स्वर्ग में अगर लैपटॉप आ जाये तो क्या होगा । चलिए स्वर्ग में लैपटॉप नाम के इस व्यंग्य में देखते हैं ।

एक बार विष्णु भगवान शिवधाम गये तो उन्होंने देखा कि शिव जी कान में लीड लगाकर लैपटॉप पर गाने सुन रहे हैं । पास में बैठी गौरी माता परेशान हैं । विष्णु जी बोले क्या हुआ मॉम आप इस प्रकार टेंशन में क्यों हैं? गौरी बोली शिव पूरे दिन लैपटॉप पर फिल्में और गाने देखते रहते हैं । मुझे तो ये फिल्में और गाने बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगते हैं । विष्णु बोले तो इसमें चिंता की क्या बात है । गौरी बोलीं पहले ये योगनिद्रा में लीन रहते थे । तो मैं इनकी सेवा करती रहती थी लेकिन अब हमें कोई काम नहीं रह गया है। मैं खाली रहकर बोर हो जाती हूँ । विष्णु बोले गणेश तो आपके पास है आप उससे अपना मन बहला सकती हैं । गौरी बोलीं आप आजकल के बच्चों को तो जानते ही हैं । उनके घर में पाँव टिकते ही कहाँ हैं । पृथ्वी लोक में गणेश चतुर्थी का त्यौहार मनाया जा रहा है । वहीं लड्डू खाने गया है । तभी शिव ने लीड कानों से हटाई और बोले विष्णु अपनी माँ से तुम इतनी देर से क्या बातें कर रहे हो । विष्णु बोले कुछ नहीं । गौरी मां को आपसे शिकायत है कि आप पूरे दिन लैपटॉप पर चिपके रहते हैं । शिव बोले अब हम देवताओं के पास करने को बचा ही क्या है पहले के जमाने में राक्षस होते थे । जो हमारे दुश्मन थे हम उनसे युद्ध करते रहते थे और बिजी रहते थे लेकिन अब हमारे पास करने को कोई काम नहीं हैं ।लैपटॉप पर हमारा मन लगा रहता है । विष्णु बोले यह तो आप सही कह रहे हैं । विष्णु बोले मॉम आप तो यूं ही परेशान हो रहीं हैं । भला स्वर्ग में अब कौन ऐसा देवता बचा है जिसके पास लैपटॉप ना हो । जब से स्वर्ग में लैपटॉप आया है तब से सभी देवी – देवता इसमें ही बिजी रहते हैं । तभी लक्ष्मी आयी और विष्णु से बोलीं आपको फिल्में देखने के लिए एक लैपटॉप कम पड़ गया । जो आप शिव जी के लैपटॉप पर फिल्म देखने आये हैं । शिव बोले देख लिया गौरी विष्णु जी हमको समझा रहे थे और यह तो खुद ही लैपटॉप की गिरफ्त में हैं । गौरी बोलीं हम तो सोच रहे थे कि लैपटॉप नाम की बला से यह दूर रहते होंगे । लेकिन यह तो खुद ही लैपटॉप में चिपके रहते हैं । यह कहकर गौरी हँसने लगीं और फिर लक्ष्मी , शिव और विष्णु भी हँसने लगे।

इस प्रकार यह व्यंग यहीं पर समाप्त हो जाता है।

मोबाइल

मोबाइल एक घड़ी है।

मोबाइल एक रेडियो है।

मोबाइल एक कैलक्यूलेटर है।

मोबाइल एक कंप्यूटर है।

मोबाइल लोगों से बात कराने वाला यंत्र है।

मोबाइल रिश्तों को जोड़ने वाला मंत्र है।

मोबाइल फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, वर्डप्रैस से जोड़ता है।

सकारात्मक या नकारात्मक नजरिया?

हमारी जिंदगी में नजरिया (attitude) बहुत ज्यादा मायने रखता है। हमारा नजरिया बचपन में ही बन जाता है। हम कैसे विचार करते हैं ये हमारे नजरिए पर निर्भर करता है। अगर हमारी सोच अक्सर सकारात्मक होती है तो हमारा नजरिया सकारात्मक होता है। अन्यथा हमारा नजरिया नकारात्मक होता है। कुछ लोग जरा सी परेशानी आयी औऱ घबराने लगते हैं । उन्हें हमेशा लगता है कि यह मुसीबत हमारा पीछा नहीं छोड़ेगी। एक के बाद दूसरी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। इनका कोई अंत नहीं है। यह सोचकर वे ज्यादा परेशान हो जाते हैं। उनका नजरिया ही नकारात्मक बन जाता है। वे हर सफल व्यक्ति में केवल बुराइयाँ ही तलाशते हैं। उन्हें लोगों की अच्छाइयां कभी दिखाई नहीं देती हैं। वे लोगों में केवल नकारात्मक विचारों को फैलाते हैं। न कभी खुश रहते हैं और ना किसी को रहने देते हैं। हमेशा नकारात्मक बातों को करते रहते हैं। जीवनभर अपना नजरिया बदल नहीं पाते हैं।

इस वजह से जीवन में सदा असफल रहते हैं। अपनी असफलता का कारण दूसरों को मानते हैं। वे यह समझ नहीं पाते हैं कि उनकी असफलता की असली वजह उनका नकारात्मक नजरिया है। वे अपने आपमें कभी सुधार नहीं करते हैं। सदा दुखी और असन्तुष्ट रहते हैं। इन लोगों से मिलकर लोग अप्रसन्न हो जाते हैं। ये लोग दूसरों की परवाह नहीं करते हैं।

दूसरी तरफ सकारात्मक नजरिया वाले लोग आत्मविश्वास से भरे रहते हैं। वे जो काम करते हैं उसमें उन्हें सफलता मिलती है। अगर कभी असफल भी होते हैं तो उसका कारण तलाशते हैं और उस कमी को दूर करते हैं। वे दूसरों पर दोषारोपण नहीं करते हैं। ऐसे लोगों से मिलकर लोग खुश हो जाते हैं क्योंकि वे अच्छे विचार फैलाते हैं। ऐसे लोग बुराई में अच्छाई तलाशते हैं। उनका यह नजरिया ही उन्हें सफलता के करीब ले जाता है। वे दूसरों की अच्छाइयों की तारीफ करते हैं। ऐसे लोगों के बहुत मित्र बन जाते हैं। वे दूसरों में आशा की किरण जगाते हैं तथा लोगों को सदा प्रोत्साहित करते रहते हैं। स्वयं भी सकारात्मक रहते हैं और सकारात्मक ऊर्जा लोगों में फैलाते हैं।

जीवन में सकारात्मक औऱ नकारात्मक विचारों का अपना ही महत्व है। सकारात्मक सोच आगे बढ़ने में सहायता करती है तो नकारात्मक सोच किसी काम में आनेवाली चुनोतियों का एहसास कराती है । हमें दोनों का उचित संतुलन बनाकर अपना काम करना चाहिए। जैसे–सकारात्मक सोच वालों ने हवाई जहाज बनाया लेकिन नकारात्मक सोच वालों ने पैराशूट बनाया। हवाई जहाज बनाने वाले ने सोचा लोग हवा में उड़ सकेंगे तो नकारात्मक विचारों वालों ने सोचा अगर हवाई जहाज गिर गया तो लोग कैसे बचेंगे इसलिए उन्होंने पैराशूट बनाया जिससे लोग बच सकें।

आप इस एक उदाहरण से समझ सकते हैं कि एक हद तक नकारात्मकता सही है।